बुधवार, 12 दिसंबर 2018

मोबाइल सिग्नलों पर भ्रांतियां,मिथक एवं सच्चाई



हमारे जीवन के हर एक पहलू में आजमोबाइल उसी तरह शामिल है जिस तरह रोटी, कपड़ा और मकान | आज देश में एक सौ बीस करोड़ मोबाइल कनेक्शन कार्यरत हैं | मोबाइल ने लगभग दो दशकों से हमारे काम-धंधे में,सामाजिक संपर्कों में, अर्थव्यवस्था के तीव्र विकास में, शिक्षा एवं रोजगार में,या यूं कहें तो जीवन के प्रत्येक आयाम में सकारात्मक एवं शानदार भूमिका निभाई है | किन्तु आजकल दूसरी तरफ यह भय फैलाया जा रहा है कि मोबाइल के सिगनल स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डालते हैं | मजेदार बात यह कि जो वैज्ञानिक नहीं हैं, जिन्हें विषय का कम ज्ञान है, वह लोग ही आधी-अधूरी बातें इंटरनेट से पढ़कर लोगों में एक भय का वातावरण निर्मित कर रहे हैं |
इस तरह के लोगों को यह समझना होगाकि भ्रांति वश वह देश और समाज का कितना बड़ा नुकसान कर रहे हैं | मोबाइल सिग्नल क्या हैं ? यह एक तरह की गैर-आयनिकविद्युत-चुंबकीय तरंगे हैं,जिनकी क्षमता बहुत कम है | टीवी, रेडियो, प्रकाश इत्यादि सभी इसी तरह की तरंगें हैं | इनमें मोबाइल की तरंगों की क्षमता वास्तव में देखा जाए तो अन्य माध्यमों से निकलने वाली तरंगों से बहुत कम होने के कारण यह मनुष्य या जीव-जंतुओं के स्वास्थ्य पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं डाल पाती हैं |विश्व स्वास्थ्य संघटन ने पच्चीस हज़ार से ज्यादा शोध के नतीजों से यह माना है कि वर्तमान साक्ष्यों से इस बात की पुष्टि नहीं होती है कि न्यून स्तर के विद्युत चुम्बकीय क्षेत्रों से होने वाले विकिरण से स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है | साथ ही इस तरह के अध्ययन विश्व भर में लगातार हो रहे हैं | इंटरनेशनल टेलिकॉम यूनियन ने एक प्रश्न के उत्तर में क्या कहा अब यह भी देख लीजिए | प्रश्न था – क्या बेस स्टेशन के नजदीक रहना सुरक्षित है या बेस स्टेशनों को स्कूल या अस्पतालों के निकट बनाना सुरक्षित है ? जवाब था – ‘हाँ| किसी मोबाइल फोन बेस स्टेशन के निकट रहना सुरक्षित है, क्योंकि वे कम ऊर्जा से चलते हैं, सार्वजनिक स्थानों में इलेक्ट्रो मैग्नेटिक फील्ड के स्तर को ख़ास तौर पर इसके लिए निर्मित किया गया है |
दूरसंचार विभाग द्वारा इस विषय पर सुदृढ़ व्यवस्था बनाई है, जिसके पाँच मुख्य आधार हैं | प्रथम,क्या हमने कुछ मानक बनाए हैं ? भारत उन बहुत कम देशों में है जहां अत्यंत सावधानी पूर्वक विषय का अध्ययन कर मोबाइल टावर से निकलने वाले रेडिएशन की सीमा अन्तराष्ट्रीय गैर-आयनीकरण विकिरण संरक्षण आयोग द्वारा अनुशंसित मौजूदा अधिकतम सीमा का 1/10 कर दिया गया है | यह विश्व के सबसे श्रेष्ठ मानक माने जाते हैं | मानक बनाने का काम हो गया, अब द्वितीय सवाल उठता है - क्या हम इन मानकों का पालन कर रहे हैं ? इस संदर्भ में यह व्यवस्था लागू है कि सभी मोबाइल टावर उपयोग में आने से पूर्व इन मानकों का प्रमाणीकरण करते हैं | दूरसंचार विभाग इन दस्तावेजों की समीक्षा करता है | इसके अतिरिक्त जब भी इनटावरों पर लगे उपकरण में कोई बदलाव होता है तो दुबारा प्रमाणीकरण होना अनिवार्य है | साथ ही हर दो साल में सभी टावरों का पुनः प्रमाणीकरण होता है | तीसरा प्रश्न यह है कि– क्या यह सब वास्तव में हो रहा है ? इस पर कैसे विश्वास करें ?इस हेतु विभाग द्वारा प्रतिवर्ष दस प्रतिशत टावर साईट पर जाकर प्रमाणित अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से जांच किए जाते हैं | भारत वर्ष में दूरसंचार विभाग के लगभग40 क्षेत्रीय कार्यालयों के द्वारा यह कार्य लगातार किया जाता है | वार्षिक दस प्रतिशत जांच से यह पुख्ता होता है कि निर्धारित व्यवस्था ठीक तरह से कार्य कर रही है या नहीं | अब चौथा प्रश्न यह है कि इस तरह की जांच के लिए मानव संसाधन एवं उपकरण हैं अथवा नहीं ? इन क्षेत्रीय कार्यालयों में इस हेतु प्रशिक्षित तथा अनुभवी इंजीनियर एवं अधिकारी उपलब्ध हैं, जो लगातार यह कार्य कर रहे हैं, अत्याधुनिक मानक उपकरण भी उपलब्ध हैं | अब पाँचवाँ एवं अंतिम सवाल है कि इन मानकों का उल्लंघन करने वाली मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों पर क्या दंडात्मक कार्यवाही होती है ? जी हाँ, इन उल्लंघनकर्ता कंपनियों पर दस लाख रुपया प्रति ट्रांसमीटर पेनल्टी लगाई जाती है तथा उस टावर को बंद करा दिया जाता है जब तक वह मानक के अनुरूप पुनः जांच में दोष मुक्त नहीं पाया जाता |अब एक सवाल यह भी उपस्थित होता कि जब इन सिग्नलों से कोई समस्या ही नहीं है तो फिर इनके प्रमाणीकरण और जांच की क्या आवश्यकता है! निर्धारित सुरक्षा मानकों का अनुपालन हो रहा है अथवा नहीं यह विभाग की जिम्मेदारी है,अतः एक पारदर्शी व्यवस्था का निर्धारण किया गया है, इससे पब्लिक के बीच विश्वास का वातावरण बनता है |दूरसंचार विभाग केआधिकारिकपोर्टल https://tarangsanchar.gov.in/EMFPortalपरकोई भी व्यक्ति अपने इलाके के मोबाइलटावरों तथा उसके इलेक्ट्रो-मैग्नेटिक सुरक्षा अनुपालन की वस्तु-स्थिति की जानकारी प्राप्त कर सकता है |
विभिन्न आई आई टी एवं आई आई एस सी बेंगलुरु के 24 संकाय सदस्यों ने वर्ष 2013 में एक रिपोर्ट में यह कहा था कि– ‘हम दूरसंचार विभाग, भारत सरकार की अनुशंसाओं को समझदारी वाला और मौजूदा समय में अंतरराष्ट्रीय रूप से श्रेष्ठ पद्धति पर आधारित कदम मानते हैं | इस चरण में, कोई अतिरिक्त जानकारी मौजूद नहीं है जो इन अनुशंसाओं पर परिवर्तन की आवश्यकता महसूस कराती हो |
माननीय शिमला उच्च न्यायालय ने 30 नो व्हेंबर 2015 में इस हेतु दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा – ...ऐसा लगता है कुछ मिथक केवल लोगों में भय पैदा करने के लिये फैलाए जा रहे हैं, लेकिन जैसा कि नोबेल विजेता मैरीक्यूरी ने बिलकुल ठीक कहा है “जीवन में किसी चीज से डरने की आवश्यकता नहीं है, केवल उसे समझना जरूरी है | अब समय है कि हम अधिक समझें ताकि कम डर लगे |”
अतः मोबाइल की इस अत्यधिक उन्नत एवं उपयोगी तकनीकजो एक खूबसूरत दुनिया को रच रही है, हम उसे इस तरहकी भ्रांतियों से बचा कर रखें ताकि यह हमें उन्नति के नए शिखरों पर ले जा सके | हमारी आने वाली पीढ़ी हमें अज्ञानी और डरपोक ना समझे इसीलिए हमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना होगा |

(लेखक: विनोद गुप्ता )
( लेखक भारतीय दूरसंचार सेवा के अधिकारी हैं, यह उनके व्यक्तिगत विचार हैं )

रविवार, 11 नवंबर 2018

दूसरी तिमाही में शक्ति पम्पस को 9.27 करोड़ रुपए मुनाफा कुल राजस्व 104 प्रतिशत बढ़कर 139 करोड़ रुपए हुआ


वित्तीय वर्ष 2018-2019 के दूसरी तिमाही के मुख्य सारांश :-

Ø   30 सितंबर, 2018 को समाप्त अवधि में 68 करोड़ रुपए की तुलना में कुल राजस्व 104 प्रतिशत बढ़कर 139 करोड़ रुपए हो गया।
Ø   30 सितंबर, 2018 को समाप्त अवधि के लिए 11.42 करोड़ रुपए के मुकाबले एबिटा ((EBIDTA) 86 प्रतिशत से बढ़कर 21.24 करोड़ रुपए हो गया।
Ø   30 सितंबर, 2018 को समाप्त अवधि में 3.02 करोड़ रुपये की तुलना में पीएटी 207 प्रतिशत से बढ़कर 9.27 करोड़ रुपए रहा।
Ø   30 सितंबर, 2018 को समाप्त अवधि में प्रथम छ:माही राजस्व 159 करोड़ रुपए की तुलना में 49 प्रतिशत से बढ़कर 237 करोड़ रुपए रहा।
Ø   30 सितंबर, 2018 को समाप्त अवधि में प्रथम छ:माही (एच 1) प्रॉफिट 7.84 करोड़ रुपए की तुलना में 102 प्रतिशत से बढ़कर 15.91 करोड़ रुपए रहा।
Ø   वित्तीय वर्ष 2019 के प्रथम छ:माही (एच 1) में प्रति शेयर आय बढत 4.27 रुपये से 8.66 रुपये हुई है।



मुंबई, 02 नवम्बर 2018:   भारत के अग्रणी एनर्जी एफीशिएंट स्टेनलेस स्टील और सोलर इंटीग्रेटेड पंप बनाने वाली शक्ति पम्पस (इंडिया) लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही शानदार प्रदर्शन किया है। सौ से ज्यादा देशों में अपने प्रोडक्ट एक्सपोर्ट करने वाली शक्ति पंप लि. ने 30 सितंबर, 2018 को समाप्त वित्तीय वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही में अपने कुल राजस्व में 104 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है और राजस्व रुपए 139 करोड़ पर पहुंच गया वहीं नेट प्रॉफिट साल दर साल 207 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज करते हुए रुपए 9.27 करोड़ रहा ।
इस अवधि में कंपनी का राजस्व 68 करोड़ रुपए की तुलना में 104 प्रतिशत बढ़कर 139 करोड़ रुपए हो गया। इसी प्रकार 11.42 करोड़ रुपए के मुकाबले एबिटा (EBIDTA) 86 प्रतिशत से बढ़कर 21.24 करोड़ रुपए हो गया। इस अवधि में छ:माही  राजस्व 159 करोड़ रुपए की तुलना में 49 प्रतिशत से बढ़कर 237 करोड़ रुपए रहा।


कंपनी के अनुसार 30 सितंबर, 2018 को समाप्त अवधि में प्रथम छ:माही प्रॉफिट 7.84 करोड़ रुपए की तुलना में 102 प्रतिशत से बढ़कर 15.91 करोड़ रुपए रहा । वहीं 2019 के प्रथम छ:माही (एच 1) में प्रति शेयर आय बढ़त 4.27 से 8.66 हुई है।
कंपनी के प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए श्री दिनेश पाटीदार, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, शक्ति पम्पस (इंडिया) लिमिटेड ने कहा-कम्पनी अपनी जिन नीतियों पर काम कर रही है वो इन परिणामो में दिख रहा है। सरकार भी सोलर प्रोजेक्ट को बढ़ावा दे रही है, जिसका आगे चलकर सबको फायदा होगा। एमएनआरई, राज्य सरकार, अंतर्राष्ट्रीय सोलर अलायन्स (आईएसए), नाबार्ड इत्यादि द्वारा हम भविष्य में भी सोलर प्रोजेक्ट पर ध्यान केन्द्रित करेंगे और हमारे विक्रेता/ वितरक नेटवर्क को फैलाते हुए निर्यात व्यापर को बढ़ाने के प्रयास जारी रखेंगे।
यूनियन बजट में की गई घोषणा जिसमें अक्षय उर्जा खास कर सोलर उर्जा पर अत्यधिक ध्यान केन्द्रित रहा जो कंपनी के लिए लाभदायक रहेगा। आईएसए (ISA) द्वारा ईईएसएल (EESL)को अपने 5 लाख सोलर पंप का प्रोजेक्ट एसाइन्ड किये गए जो कि एक स्वागत योग्य कदम है, और जो अंतराष्ट्रीय सोलर व्यापर में भारतीय कंपनियों के लिए द्वार खोलेगा। कुसुम योजना की भी घोषणा की गई जिसमे 3 करोड़ खेती उपयोगी पम्पस को आने वाले 10 वर्षों में सोलर पम्पस में परिवर्तित किये जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कुसुम एक लम्बी अवधि की महत्वाकांक्षी योजना है।
शक्ति पम्पस (इ) लिमिटेड के बारे में :


शक्ति पंप सोलर पम्पिंग की फील्ड में एक अग्रणी कंपनी है, जो स्टेनलेस स्टील पम्पस, एनर्जी सेविंग मोटर्स की फील्ड में जानी जाती है, शक्ति पंप शतप्रतिशत स्टेनलेस स्टील पम्पस का निर्माण करने वाली पहली कुछ कंपनियों में से एक है l कंपनी का लक्ष्य अतुलनीय क्वालिटी पम्पस बनाने का है जो  क्वालिटी के साथ साथ उर्जा दक्षता और लम्बे समय तक रख रखाव की कम लागत का लाभ हमारे उपभोक्ताओ को दे सके l

भारत का दिल कहलाने वाले राज्य मध्य प्रदेश के पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र में शक्ति पंप 5 लाख पम्पस प्रति वर्ष बनाने की क्षमता वाला प्लांट है जो की ISO 9001-2008 से प्रमाणित है l

शक्ति पम्पस आज अन्तार्राष्ट्रीय अग्रणी कंपनियों के साथ कंधे से कन्धा मिला कर 100 देशो में अपने उत्पादों को निर्यात कर रही है जो दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, शक्ति पम्पस का प्रोडक्ट पोर्टफोलियो कृषि, सिंचाई, औद्योगिक अनुप्रयोग एवं प्रक्रियाओं, ऊँची इमारतों में दबाव बढ़ाने, ग्रामीण/ शहरी पानी आपूर्ति योजना, और अपशिष्ट एवं गंदे पानी को उपयोगी बनाने तथा अग्निशमन आदि फ़ील्ड्स को सेवाए प्रदान करता है l

शक्ति पम्पस उच्च दक्षता एवं परिशुद्धता-उपकरणों से सज्जित है जिसकी विशेषता है जटिल एवं उच्च गुणवत्ता वाले प्रोडक्ट को असेम्बल करना यह सुविधा बेहद कुशल और प्रतिभाशाली मानव शक्ति द्वारा संचालित की जा रही है, एक पूरी तरह से कम्प्यूटराईज्ड परीक्षण प्रभाग प्रत्येक पंप के प्रदर्शन पर नज़र रखता है, इस प्रकार गुणवत्ता में स्थिरता बनाए रखता है। इसका पूर्ण आर एंड डी डिवीजन नए सामग्रियों, अनुप्रयोगों और प्रक्रियाओं के साथ अभिनव उत्पादों के अनुसंधान और विकास के लिए समर्पित है।




मंगलवार, 25 सितंबर 2018

शीर्षक साहित्य परिषद का विराट राष्ट्रीय अधिवेशन व कवि सम्मेलन 30 को


- साहित्यकारों, समाजसेवियों व पत्रकारों का होगा सम्मान

- देशभर से 100 से अधिक साहित्यकार लेंगे भाग

भोपाल। शीर्षक साहित्य परिषद का राष्ट्रीय अधिवेशन एवं अखिल भारतीय कविसम्मेलन रविवार 30 सितम्बर को प्रात: 8 बजे से मिलन गार्डन, छोला रोड भोपाल में होगा। संस्था के संस्थापक राजेन्द्र चौहान पुष्प एवं सचिव दीपक शुक्ला के अनुसार देशभर के लगभग 100 साहित्यकार समारोह में हिस्सा लेंगे। समारोह में साहित्यकारों, समाज सेवियों एवं पत्रकारों का सम्मान किया जाएगा। वरिष्ठ साहित्यकारों को श्री कृष्ण सरल सम्मान, शीर्षक लघुकथा सम्मान दिया जाएगा। कई नवांकुर एवं वरिष्ठ कवियों के साझा संकलन का विमोचन भी किया जाएगा। रात्रि में देश के प्रसिद्ध कवियों द्वारा अखिल भारतीय कविसम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
संस्था सचिव दीपक शुक्ला ने बताया कि इस वर्ष का श्रीकृष्ण सरल सम्मान सर्वश्री अशोक गोयल, दिनेश मालवीय व वीरेंद्र प्रताप सिंह को, शीर्षक पत्रकारिता सम्मान - राजकुमार सोनी, शीर्षक लघुकथा सम्मान - योगराज प्रभाकर, श्रीमती अंतरा करवड़े व डॉ. लता अग्रवाल को प्रदान किया जाएगा।








सोमवार, 10 सितंबर 2018

एयरटेल ने मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ में वॉइस गुणवत्ता बढ़ाने के लिए मोबाइल नेटवर्क को किया अपग्रेड



- कॉल को और स्थिरता देने तथा आवाज को और स्पष्ट बनाने के लिहाज से लागू किये एडवांस नेटवर्क सॉल्यूशंस

- अब कस्टमर्स भारत के सबसे तेज नेटवर्क पर लेंगें सर्वोत्तम वॉइस अनुभव का आनंद


- राजकुमार सोनी
भोपाल। भारत की अग्रणी टेलीकम्युनिकेशन सर्विस प्रदाता, भारती एयरटेल (एयरटेल) ने आज कहा कि उसने मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में अपने मोबाइल नेटवर्क में और सुधार किये हैं ताकि 4जी स्मार्टफोन यूजर्से और बेहतर वॉइस गुणवत्ता का अनुभव करने में सक्षम हो सकें। कम्पनी का यह कदम भारत के सबसे तेज मोबाइल नेटवर्क पर स्मार्टफोन के एक्सपीरियंस को और बढ़ाएगा।
स्मार्टफ़ोन यूजर्स के लिए बड़े पैमाने पर वॉइस ट्रैफिक का संचालन 3जी नेटवर्क पर होता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए कम्पनी ने अपने 3जी नेटवर्क पर अत्याधुनिक नेटवर्क सॉल्यूशंस तथा एडवांस नेटवर्क सॉफ्टवेयर लागू करके इसे और भी बेहतर बना दिया है। इसके साथ ही एयरटेल नेटवर्क से जुड़े 4जी स्मार्टफोन यूजर्स भी सुधरी हुई वॉइस क्लेरिटी, कॉल स्टेबिलिटी तथा कवरेज का अनुभव ले पाएंगे।
एयरटेल ने मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में अपने 4जी कवरेज को बढ़ाया है ताकि आसानी से हाई स्पीड डाटा का अनुभव लिया जा सके। इसके परिणामस्वरूप इंडोर तथा आउटडोर दोनों स्तरों पर 4जी की उपलब्द्धता में सुधार होगा और यह सुनिश्चित हो सकेगा कि 4जी स्मार्टफोन यूजर्स को हमेशा सबसे बेहतर डाटा स्पीड मिल सके। गौरतलब है कि एयरटेल 4जी को कई ग्लोबल एजेंसीज द्वारा निरंतर भारत के सबसे तेज नेटवर्क के तौर पर प्रमाणित किया गया है।
4जी की उपलब्धता में सुधार के साथ, ग्राहक एयरटेल टवस्ज्म् का भी चयन कर सकते हैं जो भ्क् वॉयस क्वालिटी और फास्टेस्ट कॉल सेट अप प्रदान करता है। एयरटेल टवस्ज्म् 4जी के उपलब्ध न होने के स्थिति में 3जी/2जी पर ही फालबैक के साथ बाधारहित कनेक्टिविटी की पेशकश करता है। अब 200 4जी स्मार्टफोन्स एयरटेल टवस्ज्म् को सपोर्ट करते हैं।
इस बढ़े कदम के बारे में अधिक जानकारी देते हुए श्री धर्मेंद्र खजुरिया, चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर, मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़, भारती एयरटेल, ने कहा-’हम जो भी कदम उठाते हैं उसके मूल में हमारे कस्टमर्स का हित ही सर्वोपरि होता है और हम निरंतर उनके फीडबैक पर ध्यान दे रहे हैं। 4जी स्मार्टफोन के क्षेत्र में भारी निवेश की बढ़ोत्तरी के मद्देनजर हमने अपने नेटवर्क निवेश को भी और अधिक बढ़ाया है ताकि भारी मात्रा में विस्तार पाते वॉइस और डाटा यूसेज के हिसाब से सेवाएं दे सकें। एयरटेल ने भारत में फास्टेस्ट नेटवर्क के तौर पर अपना स्थान पहले ही पक्का कर लिया है और इस नए कदम के साथ हमारे नेटवर्क पर मौजूद स्मार्टफोन यूजर्स सबसे बेहतर और सबसे आधुनिक वॉइस एक्सपीरियंस का आनंद ले सकेंगे। हम सभी कस्टमर्स को एयरटेल 4जी अपनाने और सर्वश्रेष्ठ नेटवर्क एक्सपीरियंस लेने के लिए आमंत्रित करते हैं।’
एयरटेल, मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में 13 मिलियन से भी अधिक कस्टमर्स के भरोसे का नेटवर्क है। एयरटेल के नेटवर्क ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम-प्रोजेक्ट लीप का हिस्सा होने के नाते, वित्तीय वर्ष 2018-19 में कम्पनी की योजना, मध्यप्रदेश तथा छत्तीसगढ़ में 9500 साइट्स तथा 4000 किलोमीटर्स के ऑप्टिक फाइबर्स पर काम करने की है।

मध्य प्रदेश के रत्नेश ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर यूरोप महाद्वीप के सबसे ऊंचे पर्वत माउंट एल्ब्रुस पर तिरंगा फहराया








भोपाल, मध्य प्रदेश के पर्वतारोही रत्नेश पाण्डेय ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर एक अदभुत कारनामा कर सभी भारतीयों को गौरवान्वित किया है। उन्होंने यूरोप के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर माउंट एल्ब्रुस- 18,511 फ़ीट पर तिरंगा फहराया है। रत्नेश ऐसे भारतीय पर्वतारोही हैं जिन्होंने यूरोप के सबसे ऊँचे पर्वत शिखरमाउन्ट एल्ब्रुस को फ़तेह कर साथ ही इस शिखर पर दो बार सफलतापूर्वक चढ़ाई की और एल्ब्रुस की पूर्वी और पश्चिमी शिखर दोनों में तिरंगा लहराया। पहले उत्तर की तकनीकी चढाई कर दक्षिण और फिर दक्षिण से उत्तर का सफ़र पूरा किया । 

माउंट एलब्रुस विषम मौसम परिस्थितियों के लिए प्रसिद्ध है। रत्नेश बताते हैं कि चढ़ाई के दौरान मौसम बहुत तीव्रता से बदला। 40 किलोमीटर से भी तेज हवाएं और पारा लगभग -30° था।रत्नेश ने इस अंतरराष्ट्रीय अभियान में आवाहन सामाजिक संस्था के तत्वाधान में 'कीप द माउंटेन क्लीन' का संदेश दिया, खेल और युवा कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश का झंडा भी फहराया। दिल जोड़ो अभियान के तहत, भारत-पाकिस्तान की मित्रता का संदेश दिया। पाकिस्तान की नई सरकार आने पर उनका मानना है कि दिलों में दोस्ती ही देशों में दोस्ती करा सकती है। इसके पहले रत्नेश ने एवरेस्ट की ऊंचाई पर पहुंचकर राष्ट्रीय गीत गाया और एवरेस्ट की चोटी पर तिरंगा लहराने के अपने सपने को पूरा किया। 

भारतीय पर्वतारोहण संस्थान के प्रोफेशनल माउंटेनियर रत्नेश बताते हैं – ‘मैं यह मानता हूँ कि जीवन के किसी भी मुकाम पर 'नेवर गिव अप' का सिद्धांत फॉलो करना चाहिए। अगर इरादों में मजबूती हो और मन में विश्वास हो तो इंसान अपने हर सपने को पूरा कर सकता है। इसलिए आगे बढ़ने के सपने जरूर देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने की हर संभव कोशिश करनी चाहिए। इसके लिए मानसिक बल और सकारात्मक सोच का साथ होना सबसे ज्यादा आवश्यक है। जीवन में कठिनाइयां तो आएँगी ही, इनसे हार कर या निराश होकर रुक जाना गलत है। जो इनसे लड़कर आगे बढ़ता है, जीत उसी की मुट्ठी में होती है।'
रत्नेश का लक्ष्य पर्वतारोहण जैसी साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है।